आर्बिट्रेज ट्रेडिंग रणनीतियाँ क्या हैं?

आर्बिट्रेज ट्रेडिंग एक एडवांस्ड एप्रोच है जिसके लिए ज्ञान, विश्वास और बाजारों की गहरी समझ की आवश्यकता होती है। हालांकि, यह फोरेक्स, कमोडिटी, स्टॉक और क्रिप्टो बाजारों में उपयोग की जाने वाली एक प्रसिद्ध तकनीक है, इसलिए यह सीखने लायक है।

आर्बिट्रेज का प्रतिनिधित्व कई प्रकार की रणनीतियों द्वारा किया जाता है। नीचे, आपको वह अवधारणा मिलेगी जो वित्तीय बाजारों से सबसे अधिक संबंधित है।

आर्बिट्रेज क्या है?

आर्बिट्रेज ट्रेडिंग का आईडिया अलग-अलग बाजारों में अलग-अलग रूपों में ट्रेड की गई एकल संपत्ति के बीच मूल्य अंतर से रिवार्ड या लाभ प्राप्त करना है। इसे संबंधित फाइनेंसियल इंस्ट्रूमेंट के बीच मूल्य अंतर पर भी लागू किया जा सकता है। एक ट्रेडर कम कीमत में एक संपत्ति खरीदता है और उसे उसी समय दूसरे बाजार में उच्च कीमत पर बेचता है, इस तरह छोटे मूल्य अंतर से लाभ हासिल करता है।

यह तकनीक “एक कीमत के कानून” के खिलाफ जाती है। यह एक आर्थिक अवधारणा है जो दावा करती है कि किसी एक संपत्ति की कीमत का दुनिया भर में समान मूल्य है, स्थान की परवाह किए बिना, जब कुछ कारकों पर विचार किया जाता है।

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आर्बिट्रेज को अत्यधिक लाभदायक रणनीति नहीं माना जाता है। रिवार्ड्स का साइज़ कीमतों के बीच के अंतर पर निर्भर करता है। इसलिए, एक ट्रेडर को एक महत्वपूर्ण मूल्य डाइवर्जन्स की तलाश करनी चाहिए ताकि रिवॉर्ड जोखिम से अधिक हो।

आर्बिट्रेज को अक्सर “जोखिम-मुक्त” कहा जाता है। हालांकि, आपको यह समझना चाहिए कि कोई जोखिम-मुक्त रणनीति नहीं है। हर ट्रेडिंग एप्रोच में गलत मूल्य पूर्वानुमानों और पूंजी हानि का जोखिम होता है।

आर्बिट्राज तकनीकें बहुत सारी हैं। नीचे, आप स्टैटिस्टिकल आर्बिट्रेज ट्रेडिंग रणनीति और उसके प्रकारों की परिभाषा के बारे में पढ़ेंगे।

स्टैटिस्टिकल आर्बिट्रेज ट्रेडिंग रणनीतियाँ

स्टैटिस्टिकल आर्बिट्रेज, जिसे “स्टेट आर्ब” के रूप में भी जाना जाता है को 1980 के दशक में बनाया गया था जब मॉर्गन स्टेनली के इक्विटी ब्लॉक ट्रेडिंग डेस्क को हेजिंग रणनीति की आवश्यकता थी। ट्रेडिंग डेस्क ने एक कंपनी में कई स्टॉक खरीदे और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के खिलाफ निवेश को हेज करने के लिए दूसरी कंपनी के निकट-सहसंबद्ध स्टॉक बेचे।

बाद में, ट्रेडर्स ने इस “जोड़ी” को एक रणनीति में बदल दिया जो उन्हें मूल्य अंतर से लाभ प्राप्त करने का अवसर देती है। नतीजतन, ट्रेडर्स लिक्विडिटी, जोखिम, अस्थिरता, या अन्य मौलिक और तकनीकी कारणों से होने वाले स्टैटिस्टिकल मूल्य अंतर का लाभ उठा सकते हैं।

एक उदाहरण देखें जो इस स्पष्टीकरण को आसान बना देगा। कोका-कोला कंपनी और पेप्सिको के शेयर आमतौर पर समान रूप से चलते हैं। यदि आप उनके प्राइस मूवमेंट्स में भिन्नता देखते हैं, तो यह अस्थायी लाभ पाने के अवसर का संकेत हो सकता है।

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यह माना जाता है कि डाइवर्जन्स थोड़ी देर के लिए ही रहेगा, जैसा कि आमतौर पर, शेयर एक ही दिशा में चलते हैं (मीन रिवर्श़न)। स्टैटिस्टिकल आर्बिट्रेज एप्रोच को लागू करने के लिए, आपको गिरावट वाले स्टॉक को खरीदना चाहिए और जो बढ़ता है उसे बेच देना चाहिए। ट्रेडर उम्मीद करता है कि कीमतें फिर से बढ़ेंगी।

स्टैटिस्टिकल एप्रोच में कई ट्रेडिंग रणनीतियाँ शामिल हैं, जिनमें रिस्क आर्बिट्रेज, हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग, न्यूरल नेटवर्क और वालटिलिटी आर्बिट्रेज शामिल हैं।

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वालटिलिटी आर्बिट्रेज ट्रेडिंग रणनीति

यह आगामी वोलाटिलिटी के साइज़ की धारणा पर आधारित एक रणनीति है। एक ट्रेडर को मुख्य एसेट की आगामी अस्थिरता की डिग्री का अनुमान लगाने में सक्षम होना चाहिए और ऐसा एसेट ढूंढना चाहिए जिसकी वर्तमान अस्थिरता या तो कम या बहुत ज्यादा हो। कई फंडामेंटल  कारक वालटिलिटी में अंतर पैदा कर सकते हैं। शेयर बाजार में अर्निंग रिपोर्ट, मर्जर, अधिग्रहण की अटकलों और पेटेंट विवादों के आसपास अनिश्चितताओं इसमें शामिल हैं।

यदि कोई ट्रेडर मानता है कि किसी परिसंपत्ति की करंट वालटिलिटी को कम करके आंका गया है, तो वे कॉल के लिए एक खरीद ट्रेड खोलते हैं और अंतर्निहित परिसंपत्ति को हेज करते है। नतीजतन, ट्रेडर का पोर्टफोलियो डेल्टा न्यूट्रल हो जाता है। जब वालटिलिटी बढ़ जाती है, और परिसंपत्ति अपने उचित मूल्य पर पहुंच जाती है, तो ट्रेड को अपरिवर्तित स्टॉक मूल्य के साथ सफल माना जाता है।

आप अनुमानित संपत्ति के लिए इनवर्स रूल्स का उपयोग कर सकते हैं, कॉल बेच सकते हैं और अंतर्निहित संपत्ति खरीद सकते हैं।

रणनीति का तात्पर्य गलत धारणा से संबंधित जोखिमों से है, चाहे परिसंपत्ति का मूल्य अधिक आंका गया हो या कम आंका गया हो, पोजीशन को होल्ड करने का समय, और अंतर्निहित परिसंपत्ति की कीमत में परिवर्तन।

क्या सीखें 

सही ट्रेडिंग रणनीति कैसे बनाएं: 5 महत्वपूर्ण कदम

आर्बिट्रेज ट्रेडिंग कई तरह की है और इसमें कई रणनीतियाँ शामिल हैं। आप इस तकनीक को कई बाजारों में लागू कर सकते हैं। इसलिए, सबसे पहले, आपको यह निर्धारित करना चाहिए कि आप किन संपत्तियों को ट्रेड करना चाहते हैं। दूसरा, आपको यह निर्धारित करने की आवश्यकता है कि कौन सा एप्रोच सबसे अच्छा काम करता है। उसके बाद ही आपको कीमतों में अंतर का उपयोग करके ट्रेडिंग करने की कोशिश करनी चाहिए।

डिस्क्लेमर: कोई भी रणनीति 100% सही ट्रेडिंग परिणाम की गारंटी नहीं दे सकती है।

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