अपने निवेश लक्ष्यों को कैसे समझें और कैसे उन तक पहुँचें

आप निवेश क्यों करना चाहते हैं? आपके मन में शायद कुछ विचार आते होंगे। अधिकांश लोगों के लिए सबसे बड़ा वित्तीय लक्ष्य घर के मालिक बनना है, जो कठिन दर कठिन होता जा रहा है। 2000 के बाद से रियल एस्टेट की कीमतों में 73% की वृद्धि हुई है, और पहली बार खरीद करने वालों की औसत आयु भी बढ़ी है। इसलिए, यदि आप घर खरीदने के लिए अपने निवेश रिटर्न का उपयोग करना चाहते हैं, तो आप ऐसा करने वाले पहले व्यक्ति नहीं होंगे।

यह लेख सही लक्ष्य निर्धारित करने के महत्व और यह आपकी निवेश यात्रा को कैसे प्रभावित कर सकता है इस बारे में बात करेगा।

लक्ष्य क्यों मायने रखते हैं

कुछ लोग का गलत मानना है कि अगर आपको कोई उम्मीद नहीं है, तो आप निराश नहीं हो सकते। लेकिन जब आप भविष्य में कुछ दशकों को देखते हैं, तो आप महसूस कर सकते हैं कि आपने व्यर्थ में अपना समय, ऊर्जा और प्रयास बर्बाद कर दिया है। लक्ष्य निर्धारित करना “निराशा से बचने के लिए जीने” की मानसिकता से दूर होने और दिशा, ध्यान और जवाबदेही की तरफ बढ़ने के लिए पहला कदम है।

निवेश करने के कई अलग-अलग तरीकों के साथ, नए लोग निश्चित रूप से अभिभूत हो सकते हैं। यही कारण है कि लक्ष्य के साथ शुरू करना सही तरफ चलने में मदद करता है। आप बिंदु A से बिंदु B तक की यात्रा को प्रबंधनीय चरणों में विभाजित करते हैं। और यह सोचने के बजाय कि केवल कुछ चुनिंदा लोग ही वित्तीय समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं, आप अपने सामने एक स्पष्ट रोडमैप देखते हैं।

अपने निवेश लक्ष्यों को परिभाषित करना

बुनियादी निवेश उद्देश्य विकास, परिरक्षण ण और नकदी प्रवाह हैं। अधिकांश निवेशकों को इन उद्देश्यों को एक ही विकल्प तक सीमित करने की आवश्यकता नहीं है; यह आमतौर पर तीनों का मिश्रण होता है।

  • विकास: यदि आप निवेश के माध्यम से अपनी पूंजी बढ़ाना चाहते हैं, तो आप संपत्ति (जैसे, ब्लू-चिप स्टॉक, ग्रोथ स्टॉक) बेचकर ऐसा कर सकते हैं।
  • परिरक्षण: इसका तात्पर्य है मामूली प्रतिफल के साथ अपेक्षाकृत सकुशल और सुरक्षित निवेश करना।
  • कैश फ्लो: इसका मतलब है कि आपकी प्राथमिकताएं आय और उच्च जोखिम के साथ उच्च रिटर्न दर की ओर बढ़ रही हैं।
  • सेकेंडरी उद्देश्य: कर न्यूनीकरण और लिक्विडिटी जैसे कारक भी आपके निवेश के चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं।

अपने आप से पूछने वाले प्रश्न

निवेश शुरू करने से पहले यहां कुछ मार्गदर्शक प्रश्न दिए गए हैं:

  • आपके व्यक्तिगत लक्ष्य क्या हैं, और आपके प्रोफेशनल लक्ष्य क्या हैं?
  • आपकी वित्तीय कमजोरियां क्या हैं?
  • आपको कितनी आय की आवश्यकता है, और आपको इसकी क्यूँ आवश्यकता है?
  • आप कब रिटर्न प्राप्त करने की उम्मीद करते हैं?
  • आप किस स्तर के जोखिम के साथ सहज हैं? आप कितना खोने की हिम्मत रखते हैं?
  • आप किस प्रकार के निवेश को बेहतर समझते हैं? क्या आपके पास पूर्व अनुभव है?
  • आपकी आदर्श जीवन शैली क्या है? इसमें किस प्रकार की भौतिक चीजें शामिल हैं (मकान, यात्रा, नाव, कार)?
  • जब आप 45/55/65/75 के होंगे तो आप कहाँ पर खुद को देखना चाहेंगे?

समय सीमा के आधार पर अपने लक्ष्यों को समूहीकृत करना

अपने लक्ष्यों को अलग-अलग समयावधियों में विभाजित करना सहायक होता है:

  • शोर्ट-टर्म: अपना कर्ज कम करना, कार पर डाउन पेमेंट करना, छुट्टी पर जाना, आपातकालीन निधि बनाना, आय बढ़ाना, बीमा करवाना;
  • मीडियम-टर्म: घर पर डाउन पेमेंट करना, शादी के लिए बचत करना, नवीनीकरण करना, छात्र ऋण चुकाना, व्यवसाय शुरू करने के लिए पर्याप्त बचत करना;
  • लॉन्ग-टर्म: गिरवी मुक्त होना, सेवानिवृत्ति के लिए बचत करना, अपने बच्चों की ट्यूशन के लिए भुगतान करना, दूसरी संपत्ति खरीदना।

अपने निवेश लक्ष्यों को प्राप्त करना

प्रत्येक लक्ष्य के लिए समय सीमा के आधार पर, आपको उपयुक्त निवेश और रणनीति चुनने की आवश्यकता होगी। अलग-अलग अवधियों के लिए एक ही दृष्टिकोण का उपयोग करने का कोई मतलब नहीं है क्योंकि 1 साल के और 10 साल के लक्ष्य समान नहीं हैं।

यह निर्धारित करते समय कि कितनी राशि का निवेश करना है, आपको समय सीमा पर भी विचार करने की आवश्यकता है। गणना करें कि मुद्रास्फीति के कारण आपका रिटर्न कितना बदल सकता है – भविष्य में जितना अधिक होगा, अंतर उतना ही अधिक होगा।

इसके अलावा, अपने पोर्टफोलियो में विभिन्न प्रकार के बहुत सारे एसेट शामिल करें। यह सुनिश्चित करेगा कि एक एसेट या एसेट क्लास का प्रदर्शन आपके पूरे पोर्टफोलियो को प्रभावित नहीं करेगा और आपको अपने वांछित रिटर्न तक पहुंचने से नहीं रोकेगा। और इसमें न केवल कई अलग-अलग साइज़ और क्षेत्रों की कंपनियों से स्टॉक खरीदना शामिल है, बल्कि आपको विभिन्न बाजारों में भी पोजीशन बनाने की आवश्यकता है।

जैसे-जैसे समय बीतता है और आपके मीडियम और लॉन्ग-टर्म लक्ष्य शोर्ट-टर्म लक्ष्य बनने के करीब आते हैं, आपको अपने निवेश को समायोजित करने की आवश्यकता होगी। उदाहरण के लिए, यदि आप सेवानिवृत्ति से कुछ साल दूर हैं, तो शेयर बाजार से अपना धन निकालना शुरू करें।

विभिन्न आयु समूहों के लिए पोर्टफोलियो के उदाहरण

आप जीवन में कहां हैं, इसके आधार पर आपके निवेश के विकल्प बदलेंगे। नीचे दिए गए  सैंपल पोर्टफोलियो यह बताएँगे कि आप अपने परिसंपत्ति आवंटन को कैसे समायोजित कर सकते हैं।

1. युवा प्रोफेशनल (कोई डिपेंडेंट नहीं)

संभावित पोर्टफोलियो (अपेक्षाकृत उच्च जोखिम)): एग्रेसिव ग्रोथ और ग्रोथ फण्ड (70%), सरकारी बांड (25%), कैश रिज़र्व (5%)

2. छोटे बच्चों के साथ कामकाजी परिवार

संभावित पोर्टफोलियो (कम जोखिम के साथ लॉन्ग-टर्म विकास): एग्रेसिव ग्रोथ और ग्रोथ फण्ड (70%), सरकारी बांड (20%), कैश रिज़र्व (10%)

3. बड़े बच्चों के साथ पीक अर्जक 

संभावित पोर्टफोलियो: एग्रेसिव ग्रोथ और ग्रोथ फण्ड (65%), सरकारी बांड (25%), कैश रिज़र्व (10%)

4.एम्प्टी नेस्टरस

संभावित पोर्टफोलियो (विकास और आय के लिए फंड्स का मिश्रण): : एग्रेसिव ग्रोथ और ग्रोथ फण्ड (60%), सरकारी बांड (20%), कैश रिज़र्व (20%)

5. सेवानिवृत्ति की आयु

संभावित पोर्टफोलियो (अधिक कन्सर्वटिव फंड, कर-मुक्त आय): फिक्स्ड इनकम फंड (40%), इक्विटी फंड (30%), मनी मार्केट (30%)।अब आप समझ गए होंगे कि एक निवेशक के लिए लक्ष्य आवश्यक हैं – अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए, एक निवेश योजना बनाने के लिए, और आपको रास्ते में प्रेरित रखने के लिए!

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